वे भूले हुए दिन

ताजमहल की मीनारों पर कभी दौडकर चढ़ जाते थे।
टेड़ी मेडी कठिन सीडियां, कभी नहीं ठोकर खाते थे ।
तोड़ी थी जंजीरें देश की, अब जाने क्या बात हो गई।
टूट न पाए शैय्या बंधन, अर्जित साडी शक्ति खो गई ।

– करुणेश

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